सुकमा, 29 जनवरी 2026/sns/-दिव्यांगजनों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत रायपुर स्थित लोक भवन, सिविल लाइन में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़, माननीय श्री रमेन डेका के करकमलों द्वारा दृष्टिबाधित बच्चों के लिए तैयार की गई दो महत्वपूर्ण ब्रेल पुस्तकों का विमोचन और 3200 से अधिक ऑडियो बुक्स का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा सुकमा की शिक्षिका ममता सिंह को सम्मानित किया गया। ममता सिंह ने हल्बी बोली में बस्तर क्षेत्र की विभिन्न पर्यटन स्थल और छत्तीसगढ़ी कहानी, एवं हल्बी में दिव्यांग खिलाड़ियों की आत्मकथा के बारे में 100 से अधिक आडियोबुक बनाए जिसके लिए राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा विशेष रूप से स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा ऑडियो बुक्स में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेष प्लेलिस्ट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सरगुजिया कहानियां, छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी में सामान्य ज्ञान, हल्बी, पंजाबी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं में अलग-अलग प्लेलिस्ट, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजनों हेतु सरकारी योजनाओं तथा सहायता संसाधनों से संबंधित उपयोगी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। यह समस्त सामग्री “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चौनल पर एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है इस ऑडियो बुक में कुल 65 प्लेलिस्ट है माननीय राज्यपाल रमेन डेका ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के माध्यम से दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोलना समावेशी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इसे संवेदनशील सामाजिक दायित्व बताया और कहा कि वे अपने गृह राज्य असम में भी शिक्षकों को ऐसी पहल के लिए प्रेरित करेंगे। राज्यपाल ने बताया कि इन ऑडियो बुक्स को अन्य राज्यों तक भेजा जाएगा, ताकि यह कार्य राष्ट्रीय स्तर पर आदर्श बने। इस पुनीत प्रयास के लिए उन्होंने सभी शिक्षकों को बधाई दी। दृष्टिबाधित बच्चों तक सुलभ अध्ययन सामग्री पहुँचाने के उद्देश्य से इस अभियान की शुरुआत हुई। माध्यमिक शाला कुम्हाररस में सहायक शिक्षिका के रूप पदस्थ ममता सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के पीछे प्रेरणा का स्रोत राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा (दुर्ग) को वर्ष 2024 में मिला सम्मान रहा। शिक्षिका ने 25 अक्टूबर 2024 से स्वयं ऑडियो बुक्स बनाना शुरू किया और 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों के जुड़ने से यह संख्या बढ़कर 3200 से अधिक हो गई। के. शारदा और प्रीति शांडिल्य ने इससे भी मिलकर ब्रेल पुस्तकें तैयार कर छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल विद्यालयों को 100-100 प्रतियां निःशुल्क उपलब्ध कराई थी। इस सराहनीय कार्य में योगदान देने वाले शिक्षकों को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। इस ऑडियो बुक निर्माण में राज्य के 30 शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही।
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