अंबिकापुर, 20 जनवरी 2026/sns/- जिले में धान खरीदी व्यवस्था में तकनीक के प्रभावी उपयोग से किसानों के अनुभव अब पूरी तरह बदल गए हैं। पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल सुविधाओं ने धान विक्रय की प्रक्रिया को न केवल आसान बनाया है, बल्कि किसानों को समय और संसाधनों की बचत का भी लाभ दिया है। ग्राम पंचायत किशुननगर के किसान श्री दीपन सिंह इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
किसान श्री दीपन सिंह ने बताया कि वे इस वर्ष 40 क्विंटल धान का विक्रय कर रहे हैं। पहले धान उपार्जन केन्द्रों में टोकन कटाने और भीड़ के कारण लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब किसान तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे ही टोकन कट रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था से समिति के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और किसान अपनी सुविधा अनुसार टोकन ले पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नमनाकला उपार्जन केन्द्र में पहुंचते ही गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना जैसी सभी प्रक्रियाएं व्यवस्थित ढंग से पूरी की गईं। इस व्यवस्था के कारण धान विक्रय में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आई। उपार्जन केन्द्र में किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं और समिति कर्मचारियों द्वारा हर स्तर पर सहयोग किया जा रहा है।
किसान श्री दीपन सिंह ने बताया कि धान के साथ वे मक्का, गेहूं और अरहर की खेती भी कर रहे हैं। जिससे आमदनी बढ़ी है। शासन द्वारा धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी किए जाने से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इससे वे अन्य खेती में भी निवेश कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू की गई किसान हितैषी नीतियों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसानों का भरोसा बढ़ा है और प्रदेश का किसान आत्मनिर्भरता और सशक्त हो रहे है।

