सुकमा, 19 दिसंबर 2025/sns/- सुकमा जिला कृषि के साथ-साथ मछली पालन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में वैज्ञानिक तकनीकों और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जिले के मछली पालक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हैं।
इसी क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, सुकमा द्वारा कोंटा विकासखंड के डुब्बाटोटा, नागलगुंडा एवं बिरला ग्रामों में मछली पालकों के तालाबों का निरीक्षण किया गया। मछली पालन विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह राठौर ने किसानों को जलकृषि की आधारभूत जानकारियाँ देते हुए बताया कि एक हेक्टेयर तालाब में मछलियों का घनत्व 7500 से अधिक नहीं होना चाहिए तथा पानी में पर्याप्त प्लवक का होना आवश्यक है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता जैसे पीएच, घुलित ऑक्सीजन, तापमान एवं अमोनिया की जांच कर इनके प्रभावों की जानकारी दी और एंटीबायोटिक के उपयोग से बचने की सलाह दी। किसानों ने वैज्ञानिक सुझावों को अपनाने का आश्वासन दिया।
डॉ. राठौर ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र की तकनीकी सलाहों को अपनाकर किसान बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इस भ्रमण को सफल बनाने में ज्योतिष कुमार पोटला की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

