कवर्धा, 31 जुलाई 2025/sns/- सावन मास में कबीरधाम जिले में बोल बम, हर हर महादेव और हर-हर नर्मदे के जयघोष गूंज रहे हैं। भक्तिभाव और आस्था से ओत-प्रोत यह दृश्य तब और अद्भुत हो जाता है जब हजारों कांवड़िये भगवा वस्त्रों में पंक्तिबद्ध होकर मां नर्मदा के पावन जल को कांवर में भरकर पैदल चलते हुए जिले के शिवधामों, बाबा भोरमदेव, जलेश्वर महादेव डोंगरिया और पंचमुखी बुढ़ामहादेव में जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
इस पवित्र कांवड़ पदयात्रा की शुरुआत अमरकंटक से होती है, जहां कावंड़िया मां नर्मदा की पवित्र जल भरकर कांवड़ उठाते हैं। इसके पश्चात यह विशाल कांवड़ यात्रा गोपालपुर, लमनी, खुड़िया, बजाक, हनुमतखोल, पोलमी, पंडरिया, पांडातराई, डोंगरिया, पोड़ी होते हुए भोरमदेव और फिर कवर्धा के पंचमुखी बूढ़ामहादेव की ओर अग्रसर होती है। पूरे मार्ग में भगवा रंग से रंगे हुए श्रद्धालुओं के जत्थे मनमोहक और श्रद्धावान दृश्य प्रस्तुत करते हैं, जो सावन की पावनता को और अधिक जीवंत बना देते हैं। कबीरधाम जिला इन दिनों पूर्णतः शिवमय हो गया है। मंदिरों में भजन-कीर्तन की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे वातावरण को एक अलौकिक रंग में रंग दिया है।
इस विशाल धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ शासन और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर प्रशासन द्वारा कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से अमरकंटक के मृत्युंजय आश्रम में 20 हजार से अधिक कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को निःशुल्क ठहरने, भोजन, जल और प्रसादी की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और सहयोग का समरस अनुभव हो रहा है।
जनसहभागिता और श्रद्धा का अनूठा संगम
कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का भी परिचायक बन चुका है। युवा, बुजुर्ग, महिलाएं, सभी वर्गों से लोग इस पदयात्रा में सहभागी बन रहे हैं। मार्ग में स्थानीय ग्रामवासी श्रद्धा भाव से कांवड़ियों के लिए स्वागत, जल वितरण, फल वितरण और विश्राम की व्यवस्था कर रहे हैं।


