छत्तीसगढ़

कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने ’राजस्व समाधान रथ’ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

कवर्धा, 24 जुलाई 2025/sns/-   जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की राजस्व संबंधी समस्याओं का अब गांव में पहुंचकर मौके पर ही त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने आज कलेक्टोरेट परिसर से तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित राजस्व समाधान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभिनव पहल जिले में राजस्व संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान को गांव-गांव पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह रथ कंप्यूटर, प्रिंटर, फोटोकॉपी मशीन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है तथा इसमें दो प्रशिक्षित ऑपरेटर और एक सहयोगी कर्मचारी की तैनाती की गई है। राजस्व समाधान रथ को लोक सेवा केन्द्र से जोड़ा गया है, जिससे लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं का त्वरित निपटान सुनिश्चित हो सकेगा।
कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व समाधान रथ के माध्यम से ग्रामीणों को भूमि रिकॉर्ड, नक्शा, खसरा, गिरदावरी, नामांतरण, एग्री स्टेक पंजीयन जैसे कार्यों की सुविधा उनके गांव में ही प्रदान की जाएगी। कलेक्टर ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ दस्तावेजी समाधान नहीं, बल्कि शासन की जनसेवा भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों, तहसीलदारों और राजस्व निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि रथ की नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा शिविरों के संचालन में आपसी समन्वय बनाए रखते हुए अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाया जाए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर डॉ मोनिका कोड़ों, श्री विनय पोयाम, श्री मुकेश रावटे, श्री नरेन्द्र पैकरा, डिप्टी कलेक्टर श्री बी आर देवांगन सहित राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।कलेक्टर श्री वर्मा के मार्गदर्शन में जिले में राजस्व समाधान रथ के संचालन के लिए विस्तृत रूट चार्ट तैयार किया गया है। यह रथ प्रत्येक चिन्हित गांव में पहुंचेगा और वहीं पर राजस्व संबंधी समस्याओं का स्थल पर ही समाधान किया जाएगा। यह पहल न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीणों को समय और संसाधनों की भी बचत होगी। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह पहल केवल एक सेवा नहीं, बल्कि शासन की जनहितकारी सोच का विस्तार है। अब सेवाएं ग्रामीणों के द्वार पर पहुंचेंगी, जिससे सरकारी तंत्र और जनता के बीच की दूरी कम होगी। यह अभिनव प्रयास डिजिटल तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के सफल समन्वय का उदाहरण है, जो सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम सिद्ध होगा।

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